Friday, 31 May 2013

|| स्तुति -श्री हनुमान ||

|| स्तुति -श्री हनुमान ||


|| स्तुति -श्री हनुमान ||

हनुमान द्द्रजनी सूनुर्वायु पुत्रो महाबलः।
रामेष्टः फाल्गुनसखः पिङ् गाक्षोऽमित विक्रमः॥
उदधिक्रमणश्चैव सीता शोकविनाशनः।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः।
स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।

आनंद रामायण (8/3/8-11)

उनका एक नाम तो हनुमान है ही, दूसरा अंजनी सूनु, तीसरा वायुपुत्र, चौथा महाबल, पांचवां रामेष्ट (राम जी के प्रिय), छठा फाल्गुनसख (अर्जुन के मित्र), सातवां पिंगाक्ष (भूरे नेत्र वाले) आठवां अमितविक्रम, नौवां उदधिक्रमण (समुद्र को लांघने वाले), दसवां सीताशोकविनाशन (सीताजी के शोक को नाश करने वाले), ग्यारहवां लक्ष्मणप्राणदाता (लक्ष्मण को संजीवनी बूटी द्वारा जीवित करने वाले) और बारहवां नाम है- दशग्रीवदर्पहा (रावण के घमंड को चूर करने वाले) |

ये बारह नाम श्री हनुमानजी के गुणों के द्योतक हैं। श्रीराम और सीता के प्रति जो सेवा कार्य उनके द्वारा हुए हैं, ये सभी नाम उनके परिचायक हैं और यही श्री हनुमान की स्तुति है। इन नामों का जो रात्रि में सोने के समय या प्रातःकाल उठने पर अथवा यात्रारम्भ के समय पाठ करता है, उस व्यक्ति के सभी भय दूर हो जाते हैं।

ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः|

दीनदयाल बिरिदु सम्भारी !हरहु नाथ मम संकट भारी !!

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||शिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम् ||

||शिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम् ||

ॐ अथ शिवप्रातःस्मरणस्तोत्रम् |

प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् |
खट्ट्वङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ||१||

प्रातर्नमामि गिरिशं गिरिजार्धदेहं
सर्गस्थितिप्रलयकारणमादिदेवम् |
विश्वेश्वरं विजितविश्वमनोभिरामं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ||२||

प्रातर्भजामि शिवमेकमनन्तमाद्यं
वेदान्तवेद्यमनघं पुरूषं महान्तम् |
नामादिभेदरहितं षड्भावशून्यं
संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ||३

कर्पूरगौरं करुणावतार संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्द भवं भवानीसहितं नमामि ॥

ॐ नमः शिवाय !ॐ नमः शिवाय !ॐ नमः शिवाय !ॐ नमः शिवाय ! ॐ नमः शिवाय !

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||ॐ हं हनुमंतये नम||

||ॐ हं हनुमंतये नम||


||ॐ हं हनुमंतये नम||

ॐ मनोजवं मारुततुल्य वेगं,जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् .
वातात्मजं वानरयूध मुख्यं,श्री रामदूतं शिरसा नमामि ..

राम दूतो लोक बन्धुः अन्तरात्मा मनोरमः .
श्री राम ध्यानकृद् वीरः सदा किंपुरुषस्स्तुतः
राम कार्यांतरंगश्च शुद्धिर्गतिरानमयः .
पुण्य श्लोकः परानन्दः परेशः प्रिय सारथिः
लोक स्वामि मुक्ति दाता सर्व कारण कारणः .
महा बलो महा वीरः पारावारगतिर्गुरुः
समस्त लोक साक्षी च समस्त सुर वंदितः .
सीता समेत श्री राम पाद सेवा दुरंधरः

ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः !!
ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः !!

संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी ! हरहु नाथ मम संकट भारी !!

राम सिया राम सिया राम जय जय राम!
राम सिया राम सिया राम जय जय राम!

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||श्री महागणेश पञ्चरत्नं||

||श्री महागणेश पञ्चरत्नं||


||श्री महागणेश पञ्चरत्नं||

मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकं
कलाधरावतंसकं विलासि लोक रक्षकम् .
अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकं
नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् .. १..

नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरं
नमत् सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्धरम् .
सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं
महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् .. २..

समस्त लोक शंकरं निरास्त दैत्य कुन्जरं
दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रं अक्षरम् .
कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं
मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् .. ३..

अकिंचनार्ति मर्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनं
पुरारिपूर्वनन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् .
प्रपञ्चनाश भीषणं धनंजयादि भूषणं
कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम् .. ४..

नितान्त कान्त दन्तकान्तिमन्तकान्तकात्मजं
अचिन्त्यरूपमन्तहीनमन्तराय कृन्तनम् .
हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनां
तमेकदन्तमेकमेव चिन्तयामि सन्ततम् .. ५..

.. फल श्रुती ..

महागणेश पञ्चरत्नं आदरेण योन्ऽवहं
प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन्ं गणेश्वरम् .
अरोगतां अदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रतां
समाहितायुरष्ट भूतिमभ्युपैति सोऽचिरत् ..

इति श्री शंकराचार्य विरचितं श्री महागणेश पञ्चरत्नं संपूर्णम् ..

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हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम


हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

मत्तगयंद छंद :

बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सो जात न टारो।
देवन आनि करी विनती तब,
छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के संग लेन गये सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब,
लाय सिया सुधि प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को तब,
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बाण लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तज्यो सुत रावन मारो।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग की फाँस सबै सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावण सैन्य समेत संहारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज किए बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कुछ संकट होय हमारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥

दोहा :
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः|

दीनदयाल बिरिदु सम्भारी !हरहु नाथ मम संकट भारी !!
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||क्षमा-प्रार्थना||

||क्षमा-प्रार्थना||


||क्षमा-प्रार्थना||

अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वशरि॥१॥
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वशरि॥२॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वपरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु मे॥३॥
अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत्।
यां गतिं समवाप्नोति न तां ब्रह्मादयः सुराः॥४॥

सापराधोऽस्मि शरणं प्राप्तस्त्वां जगदम्बिके।
इदानीमनुकम्प्योऽहं यथेच्छसि तथा कुरु॥५॥
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वकरि॥६॥

कामेश्वंरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्वदरि॥७॥
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्व रि॥८॥

ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः!!
ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः, ॐ श्री दुर्गाय नमः!!

जय माता दी, जय माता जी! जय माता दी, जय माता जी !

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||नमामि अम्बे दीन वत्सले||

||नमामि अम्बे दीन वत्सले||


||नमामि अम्बे दीन वत्सले||

या देवी सर्वभुतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं , नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी। 
हरिप्रिय नमस्तुभ्यं , नमस्तुभ्यं दयानिधे।। 

नमामि अम्बे दीन वत्सले,
तुम्हे बिठाऊँ हृदय सिंहासन .
तुम्हे पिन्हाऊँ भक्ति पादुका,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

श्रद्धा के तुम्हे फूल चढ़ाऊँ,
श्वासों की जयमाल पहनाऊँ .
दया करो अम्बिके भवानी,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

बसो हृदय में हे कल्याणी,
सर्व मंगल मांगल्य भवानी .
दया करो अम्बिके भवानी,
नमामि अम्बे भवानि अम्बे ..

या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

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हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम
हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

मत्तगयंद छंद :
बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सो जात न टारो।
देवन आनि करी विनती तब,
छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के संग लेन गये सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब,
लाय सिया सुधि प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को तब,
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बाण लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तज्यो सुत रावन मारो।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग की फाँस सबै सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावण सैन्य समेत संहारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज किए बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कुछ संकट होय हमारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥

दोहा :
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः|

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||श्री गणेश जी की आरती||

||श्री गणेश जी की आरती||

||श्री गणेश जी की आरती||

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी ।

पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा ॥
अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया ।

दीनन की लाज राखो शम्भु-सुत वारी ।
कामना को पूरी करो जग बलिहारी ।
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।





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Thursday, 30 May 2013

||नारायणम् भजे नारायणम्||

||नारायणम् भजे नारायणम्||
||नारायणम् भजे नारायणम्||

नारायणम् भजे नारायणम् , लक्ष्मी नारायणम् भजे नारायणम्- - २
नारायणम् नारायणम् 

वृन्दावन स्थितम् नारायणम् 
देववृन्दैर् अभिस्थितम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

दिनकर मध्यम् नारायणम्
दिव्य कनकाम्बर धरम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

पंकज लोचनम् नारायणम्
भक्त संकट मोचनम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

करुणा पयोनिधिम् नारायणम्
भव्य शरणागत निधिम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

रक्षित जगत् त्रयम् नारायणम्
चक्र शिक्षिता सुरचयम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

अज्ञान नाशकम् नारायणम्
शुद्ध विज्ञान भाशकम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

श्रीवत्स भूषणम् नारायणम्
नन्द गोवत्स पोषणम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

शॄगार नायकम् नारायणम्
पदगंगा विधायकम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

श्रीकान्त सेवितम् नारायणम्
नित्य वैकुण्ठ वसितम् नारायणम् . . . नारायणम् भजे . . .

||इति श्री नारायणम् भजे नारायणम्||


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 Panchali Padavs and Parthasarth
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दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र

दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र
|| दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र ||

भगवान् शिव के तीन नेत्र हैं। मस्तक पर चन्द्रमा का मुकुट शोभायमान है। जटाजूट कुछ-कुछ पीला हो रहा है। सर्पों के हार से उनकी शोभा बढ़ रही है। उनके कण्ठ में नीला चिह्न है। उमके हाथ में वरद तथा दूसरे हाथ में अभय-मुद्रा है। वे व्याघ्र-चर्म पहने रत्नमय सिंहासन पर विराजमान हैं। उनके वाम भाग में भगवती उमा का चिन्तन करे।

इस प्रकार युगल दम्पति का ध्यान करके उनकी मानसिक पूजा करे। इसके बाद सिंहासन पर स्थित महादेवजी का पूजन करे। पूजा के आरम्भ में एकाग्रचित्त हो संकल्प पढ़े। तदनन्तर हाथ जोड़कर मन-ही-मन उनका आह्वान करे-’ हे भगवान् शंकर ! आप ऋण, पातक, दुर्भाग्य आदि की निवृत्ति के लिये मुझ पर प्रसन्न हों।’ इसके पश्चात् गिरिजापति की प्रार्थना इस प्रकार करे-

जय देव जगन्नाथ, जय शंकर शाश्वत। जय सर्व-सुराध्यक्ष, जय सर्व-सुरार्चित ! ।।
जय सर्व-गुणातीत, जय सर्व-वर-प्रद ! जय नित्य-निराधार, जय विश्वम्भराव्यय ! ।।
जय विश्वैक-वेद्येश, जय नागेन्द्र-भूषण ! जय गौरी-पते शम्भो, जय चन्द्रार्ध-शेखर ! ।।
जय कोट्यर्क-संकाश, जयानन्त-गुणाश्रय ! जय रुद्र-विरुपाक्ष, जय चिन्त्य-निरञ्जन ! ।।

जय नाथ कृपा-सिन्धो, जय भक्तार्त्ति-भञ्जन ! जय दुस्तर-संसार-सागरोत्तारण-प्रभो ! ।।
प्रसीद मे महा-भाग, संसारार्त्तस्य खिद्यतः। सर्व-पाप-भयं हृत्वा, रक्ष मां परमेश्वर ! ।।
महा-दारिद्रय-मग्नस्य, महा-पाप-हृतस्य च। महा-शोक-विनष्टस्य, महा-रोगातुरस्य च।।
ऋणभार-परीत्तस्य, दह्यमानस्य कर्मभिः। ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य, प्रसीद मम शंकर ! ।।
(स्क॰ पु॰ ब्रा॰ ब्रह्मो॰ ७।५९-६६)

फल-श्रुतिः
दारिद्रयः प्रार्थयेदेवं, पूजान्ते गिरिजा-पतिम्। अर्थाढ्यो वापि राजा वा, प्रार्थयेद् देवमीश्वरम्।।
दीर्घमायुः सदाऽऽरोग्यं, कोष-वृद्धिर्बलोन्नतिः। ममास्तु नित्यमानन्दः, प्रसादात् तव शंकर ! ।।
शत्रवः संक्षयं यान्तु, प्रसीदन्तु मम गुहाः। नश्यन्तु दस्यवः राष्ट्रे, जनाः सन्तुं निरापदाः।।
दुर्भिक्षमरि-सन्तापाः, शमं यान्तु मही-तले। सर्व-शस्य समृद्धिनां, भूयात् सुख-मया दिशः।।

और कोई विधि-विधान न बन सके तो श्रद्धा-विश्वास-पूर्वक केवल उपर्युक्त स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करे।

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 Charulata Saxena's
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choti si khushi ya sagar sa gam
har baar bahut yaad aaye tum.....

dil me uthe jajbaat
ya aaye naye savaalaat
... sach kahti hun
har baar bahut yaad aaye tum......

jab jab mai mahsoos karti hun
mere aansuon ki nami
har baar bahut yaad aaye tum...

ab yaadon ka silsilaa rukta nahi
mere hujoor
meri gujrti har saans se pahle
fir ek baar yaad aaye tumm.......//

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 Rita Kothar
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||गणेशगायत्री||

||गणेशगायत्री||

||गणेशगायत्री||

लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि ।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ 
महोत्कटाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥

एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
तत्कराटाय विद्महे हस्तिमुखाय धीमहि ।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥

तत्पुरूषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि ।
तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥

ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !ॐ गजाननाय नमः !

हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

हनुमान अष्टकम - संकट मोचन अष्टकम

मत्तगयंद छंद :

बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सो जात न टारो।
देवन आनि करी विनती तब,
छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के संग लेन गये सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब,
लाय सिया सुधि प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को तब,
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बाण लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तज्यो सुत रावन मारो।
लै गृह वैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग की फाँस सबै सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावण सैन्य समेत संहारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज किए बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कुछ संकट होय हमारो॥
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥

दोहा :
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः| ॐ श्री हनुमते नमः|

दीनदयाल बिरिदु सम्भारी !हरहु नाथ मम संकट भारी !!


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||सुमङ्गल स्तोत्र||

||सुमङ्गल स्तोत्र||

सुमङ्गलं मङ्गलमीश्वराय ते सुमङ्गलं मङ्गलमच्युताय ते |
सुमङ्गलं मङ्गलमन्तरात्मने सुमङ्गलं मङ्गलमब्जनाभ ते ||

सुमङ्गलं श्रीनिलयोरुवक्षसे सुमङ्गलं पद्मभवादिसेविते |
सुमङ्गलं पद्मजगन्निवासिने सुमङ्गलं चाश्रितमुक्तिदायिने ||

चाणूरदर्पघ्नसुबाहुदण्डयोः सुमङ्गलं मङ्गलमादिपूरुष |
बालार्ककोटिप्रतिमाय ते विभो चक्राय दैत्येन्द्रविनाशहेतवे ||

शङ्खाय कोटिन्दुसमानतेजसे शार्ङ्गाय रत्नोज्ज्वलदिव्यरूपिणे |
खड्गाय विद्यामयविग्रहाय ते सुमङ्गलं मङ्गलमस्तु ते विभो ||

तदावयोस्तत्त्व विशिष्टशेषिणे शेषित्वसम्बन्धनिबोधनाय ते |
यन्मङ्गलानां च सुमङ्गलाय ते पुनः पुनर्मङ्गलमस्तु सन्ततम् ||


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जय महाकाल

|| जय गणेश ||
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी |प्रभुजी ....
प्रभू जी तुम चंदन हम पानी |
जाकी अंग अंग बास समानी ||
प्रभू जी तुम घनबन हम मोरा 
जैसे चितवन चन्द्र चकोरा
प्रभू जी तुम चंदन हम पानी |
प्रभू जी तुम दीपक, हम बाती
जाकी जोत बरे दिन राती
प्रभू जी तुम चंदन हम पानी |
प्रभू जी तुम मोती हम धागा
जैसे सोने में मिलत सोहागा
प्रभू जी तुम चंदन हम पानी |
प्रभू जी तुम स्वामी हम दासा
ऐसी भक्ती करे 'रहदासा'
प्रभू जी तुम चंदन हम पानी |
|| ओम नमः शिवाय || || जय महाकाल ||