माखन चुराने आते हो, दिल ही चुराए जाते हो,
करते हो अठखेलियाँ नित नए स्वाँग रचाते हो,
यशोदा के लल्ला क्यों नित नित हमें सताते हो,
करते हो माखन चोरी फिर भी बृज राज कहाते हो,
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है
माखन की हांड़ी देखि जिसके भी अंगना
बिन जाने उसपर ये झपटत है
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है.
करते हो अठखेलियाँ नित नए स्वाँग रचाते हो,
यशोदा के लल्ला क्यों नित नित हमें सताते हो,
करते हो माखन चोरी फिर भी बृज राज कहाते हो,
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है
माखन की हांड़ी देखि जिसके भी अंगना
बिन जाने उसपर ये झपटत है
यशोदा तेरो कान्हा बड़ो नटखट है.
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